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    फ़ेक न्यूज़, डीपफ़ेक और मानहानि: भारत में शिकायत कैसे करें

    अंतिम अद्यतन: 10 अक्टूबर 2026 — उपलब्ध मसौदा, कानूनी समीक्षा की तारीख नहीं

    अस्वीकरण: यह कानूनी जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं, और अभी किसी अधिवक्ता द्वारा इसकी समीक्षा नहीं हुई है। अपनी स्थिति के लिए किसी अधिवक्ता से परामर्श करें।

    संक्षिप्त उत्तर

    अगर कोई टीवी चैनल, वेबसाइट या सोशल मीडिया पोस्ट आपके बारे में झूठे दावे फैलाए, या एडिट की गई फ़ोटो या वीडियो शेयर करे, तो आप: प्लेटफ़ॉर्म के शिकायत अधिकारी को रिपोर्ट कर सकते हैं, चैनल और फिर NBDSA (टीवी) या प्रेस काउंसिल (प्रिंट) में शिकायत कर सकते हैं, साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट कर सकते हैं, और दीवानी या आपराधिक मानहानि केस कर सकते हैं। पहले सबूत सहेजें, क्योंकि पोस्ट डिलीट हो जाती हैं।

    राय बनाम झूठे तथ्य

    कानून राय और आलोचना की रक्षा करता है, जिसमें आपकी या आपके प्रदर्शन की कड़ी आलोचना भी शामिल है।

    • आप कार्रवाई कर सकते हैं: प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले झूठे तथ्यात्मक कथन, एडिट या AI से बनी फ़ोटो और वीडियो, नफ़रत भरे भाषण, और हिंसा भड़काने वाली सामग्री पर।

    • सच, जनहित के मामले पर उचित टिप्पणी और सद्भावपूर्ण रिपोर्टिंग मानहानि मामलों में आम बचाव हैं।

    चरण 1: तुरंत सबूत सहेजें

    1. पोस्ट, अकाउंट का नाम, तारीख और समय दिखाते स्क्रीनशॉट लें।
    2. हर पोस्ट या वीडियो का सटीक लिंक (URL) कॉपी करें।
    3. आर्काइव कॉपी सहेजें (जैसे archive.today या Wayback Machine पर)।
    4. असल में क्या हुआ, यह साबित करने के लिए अपनी मूल, बिना एडिट फ़ोटो या वीडियो रखें।
    5. नोट करें किसने शेयर किया और कितना फैला।

    अदालत में इलेक्ट्रॉनिक सबूत के लिए प्रमाणपत्र चाहिए (भारतीय साक्ष्य अधिनियम धारा 63, पहले साक्ष्य अधिनियम धारा 65B)। आपके अधिवक्ता इसे तैयार कर सकते हैं।

    चरण 2: प्लेटफ़ॉर्म पर रिपोर्ट करें

    प्लेटफ़ॉर्म के रिपोर्ट विकल्प और उसके शिकायत अधिकारी का उपयोग करें (IT नियम, 2021 के तहत अनिवार्य)। प्लेटफ़ॉर्म को शिकायतों की जल्दी पावती देनी होती है और तय समय में निपटाना होता है। बिना सहमति किसी व्यक्ति को यौन या अंतरंग रूप में दिखाने वाली सामग्री, मॉर्फ़ की गई तस्वीरों सहित, शिकायत के 24 घंटे में हटानी होती है। संतुष्ट न होने पर शिकायत अपीलीय समिति (gac.gov.in) में अपील करें।

    चरण 3: टीवी, प्रिंट और डिजिटल न्यूज़

    टीवी न्यूज़: पहले चैनल से शिकायत करें। समाधान न होने पर न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) में शिकायत करें। केबल टीवी कार्यक्रम संहिता के तहत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में भी शिकायत कर सकते हैं। अख़बार: भारतीय प्रेस परिषद में शिकायत करें। डिजिटल न्यूज़ प्रकाशक: IT नियम, 2021 के तहत प्रकाशक की शिकायत व्यवस्था का उपयोग करें। इन संस्थाओं की समय-सीमा छोटी होती है, इसलिए जल्द से जल्द शिकायत करें।

    चरण 4: साइबर क्राइम और पुलिस शिकायत

    राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर रिपोर्ट करें या 1930 पर कॉल करें। जनता में भय या अव्यवस्था फैला सकने वाली झूठी सूचना या अफ़वाह फैलाना अपराध है (BNS धारा 353)।

    • समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना अपराध है (BNS धारा 196)।

    • बिना सहमति निजी तस्वीरें प्रकाशित करना और पहचान का दुरुपयोग IT अधिनियम, 2000 के तहत अपराध हैं (जैसे धारा 66C, 66E और 67)।

    चरण 5: मानहानि केस

    आपराधिक मानहानि (BNS धारा 356, पहले IPC 499–500): मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत के रूप में। सज़ा में 2 साल तक की कैद, जुर्माना या सामुदायिक सेवा हो सकती है। दीवानी मानहानि मुकदमा: अदालत से हर्जाना और सामग्री हटाने का निषेधाज्ञा आदेश मांगें। फ़ेक या मॉर्फ़ सामग्री के स्पष्ट मामलों में अदालत तत्काल हटाने का आदेश दे सकती है। आम तौर पर अधिवक्ता पहले कानूनी नोटिस भेजते हैं, जिसमें सामग्री हटाने और माफ़ी की मांग होती है।

    खुद भी सावधान रहें

    जवाब में दूसरों के बारे में झूठे दावे पोस्ट न करें। वही मानहानि और IT कानून सब पर लागू होते हैं।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    अगर न्यूज़ चैनल ने मुझे आतंकवादी या देशद्रोही कहा तो क्या शिकायत कर सकता हूं?

    हां। पहले चैनल से, फिर NBDSA में शिकायत करें। दावा झूठा हो और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाए तो मानहानि केस पर भी विचार कर सकते हैं।

    अपने डीपफ़ेक या मॉर्फ़ वीडियो की रिपोर्ट कैसे करें?

    लिंक और स्क्रीनशॉट सहेजें, प्लेटफ़ॉर्म के शिकायत अधिकारी को रिपोर्ट करें, और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। अंतरंग मॉर्फ़ सामग्री शिकायत के 24 घंटे में हटानी होती है।

    IPC 499 अब क्या कहलाती है?

    पुरानी IPC धारा 499 और 500 की मानहानि अब BNS धारा 356 है, जो 1 जुलाई 2024 से लागू है।

    क्या प्रदर्शन की आलोचना मानहानि है?

    नहीं। राय और उचित आलोचना संरक्षित हैं। मानहानि के लिए प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला झूठा तथ्यात्मक कथन ज़रूरी है।

    अगर प्लेटफ़ॉर्म शिकायत अनदेखी करे तो?

    gac.gov.in पर शिकायत अपीलीय समिति में अपील करें, या सामग्री हटाने के अदालती आदेश के लिए अधिवक्ता से बात करें।

    अस्वीकरण: यह कानूनी जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं, और अभी किसी अधिवक्ता द्वारा इसकी समीक्षा नहीं हुई है। अपनी स्थिति के लिए किसी अधिवक्ता से परामर्श करें।

    हिरासत में हैं या नोटिस मिला है?

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